बौरायी हवा
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ठंड के ठिठुरन से निजात पाकर
जाड़े की जकड़न से मुक्त होकर
आज बौराई है हवा
ऐसा लगता है
भांग के नशे में
यौवन की मस्ती में
प्रेमियों की बस्ती में
प्रेम संदेशा लायी है हवा
आज बौराई है हवा
साजन के लिए आकुल
प्रीतम के लिए व्याकुल
एक विरहिणी के गालों को सहलाकर
उसके तन- मन को और उन्मत्त बनाकर
उसे और विकल बना गई है हवा
आज बौरा गई है हवा
किसी सखी की चुनरी उड़ायी
किसी सजनी की आंचल सरकायी
किसी के माथे पर धूल चढ़ायी
खूब धूम मचायी है हवा
आज बौराई है हवा
किसी अल्हड़ नायिका सी
किसी नवयौवना बालिका सी
किसी देवर की शरारती भाभी सी
फागुनी धमार मचायी है हवा
आज बौरायी है हवा
आज सचमुच बौरायी है हवा

Smita Gupta
Assi. prof.(Hindi)
M. Ed. , Hindi Patrkarita
smita78gupta@gmail.com