प्यार का प्रतीक
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उसी गली में है उसका घर
जहां प्यार का प्रतीक
सुर्ख लाल रंग का गुलमोहर
मतवाला मदमस्त होकर झूमता है
प्रेमियों का जोड़ा बाहों में बाहें डाले घूमता है ।
उसी गली में है उसका घर
जहां अमलतास भी भरी जवानी पर है
हवा के झोको से हिलोरे खाता हुआ
गुलमोहर की कलियों को चूमता है
इस मनमोहक वातावरण में
प्रेमियों का जोड़ा
बाहों में बाहें डाले घूमता है ।
उसी गली में है उसका घर
जहां मेघ घन घोर घटा बन
एक दूसरे का आलिंगन कर
मदमाती बलखाती बूंद बूंद
हर बूंद धरा की तपन को दूर करता है ।
प्रेम की तपन में तप्त
प्रेमियों का जोड़ा बाहों में बाहें डाले
घूमता है
उसी गली में है उसका घर
जहां रात के अंधेरे में
जुगनू खुद को जला कर
हर राह हर पथ पर उजाला कर
तारों के समूह का आभास सा देता है
प्रेम की तपिश में दो प्रेमी
आलिंगन कर लबों को चूमता है ।
उसी गली में है उसका भी घर ।
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✍️ स्मिता गुप्ता

Smita Gupta
Assi. prof.(Hindi)
M. Ed. , Hindi Patrkarita
smita78gupta@gmail.com